वो मेरे से करीब ४-५ साल छोटी है, हमारी मुलाकात ऐसे ही हो गयी,पहले तो हम दोस्त बने फिर शायद उसे ये अंदाज़ा होने लगा हो की मैं उससे बहुत बड़ा हूँ :P उसने मुझे अभि भैया कहना शुरू किया :) मेरे बस दो जुनिनर हैं जो मुझे इस नाम से(अभि भैया) बुलाते हैं, एक तो है श्रुति अगरवाल और एक है नीरज सिंह.बाकी सब दोस्त मुझे अभि या अभिषेक कह के बुलाते हैं और कुछ जूनियर हैं वो भैया या अभिषेक भैया कह के बुलाते हैं...खैर, ऐसे बहुत कम से लोग हैं जिन्हें मैं अपने परिवार जैसा मानता हूँ...ये लड़की उसमे से ही एक है... :)
ये लड़की जिसका नाम है प्रभा, बहुत ही नटखट है,बातुनी.. शरारती तो नहीं कहूँगा क्यूंकि समझदार है, बहुत ख्याल रखने वाली लड़की है..इससे बातें करूँ तो दिल को एक सुकून मिलता है...छोटी है ये लेकिन बहुत डांटती भी है मुझे :) और कभी कभी तो ये इतनी समझदारी की बात करती है की मन करता है बस इसकी बातें सुनता रहूँ..... :) मैं एक बात आज कन्फेस करना चाहूँगा, शुरू शुरू में जब मेरी इससे जान पहचान नहीं थी तो मुझे लगता था की ये लड़की बहुत मोडर्न टाइप की है, और फूल ऑफ ऐटिटूड वाली लड़की है...लेकिन जल्द ही ये मेरी सोच पूरी तरह गलत साबित हुई.....दो लोगों के कारण मैंने ये मानना अब बिलकुल छोर दिया की "फर्स्ट इम्प्रेसन इज दी लास्ट इम्प्रेसन"...एक तो है ये प्रभा और दूसरा समित..समित के बारे में आप यहाँ पढ़ चुके हैं.....पहली मुलाकात में दोनों के प्रति मेरी राय कुछ ज्यादा नेक नहीं थी...मैंने दोनों को थोड़ा घमंडी भी सोचा था(माफ कर देना यार), लेकिन अब ये दोनों मेरी जिंदगी के एक अहम हिस्से बन चुके हैं...
पिछले कुछ महीनो तक, जब मैं काम में उतना व्यस्त नहीं हुआ करता था, तब इससे हर रोज जी-मेल पे बातें हुआ करती थी...अब भी होती है इससे बात लेकिन अब जी-टॉक पे चटियाने की फ्रीक्वन्सी थोड़ी कम हो गयी.. .ये तो है ही एक नंबर की पागल लड़की, कभी चैटिंग से दिल नहीं माना तो ऑफिस के फोन से ही शुरू हो गयी, फिर भले ऑफिस का फोन बिल कितना भी आये उससे इसे क्या..और वैसे उससे हमें भी क्या काम...हमें तो बातें करने से मतलब है जी..;) बातें करने का मन हुआ तो बस प्रभा के मोबाइल पे एक मिस कॉल दे दिया और उधर से ये हमें फोनिया देती है, फिर मैं क्या, ये २-३ और दोस्तों को को कान्फरन्स पे ले लिया करती थी और बातें हमारी चलती रहती थी..हाँ, कुछ महीनो पहले इसके ऑफिस में वो सब फोन कॉल की इन्क्वाइअरी शुरू हो गयी थी तो कुछ दिन तक ये फोन नहीं कर पाती थी, लेकिन अब फिर से फोन की बातचीत पहले जैसे ही जारी है, अंतर बस इतना है की अब कुछ १-२ महीनो से काम की थोड़ी ज्यादा व्यस्तता है तो बात उतनी नियमित रूप से हो नहीं पाती है..
आज सुबह भी कुछ कारण से मैं थोड़ा परेसान था, परेशानी दो दिनों से है, कुछ काम से सम्बंधित.....सुबह आज जैसे ही अपना जी-मेल लोगिन किया तो देखा ये लड़की ऑनलाइन है, सबसे अच्छी बात ये है की मैं इससे सब बातें शेयर करता हूँ...काफी अच्छा महसूस होता है, आज भी इससे बात कर के काफी अच्छा महसूस हुआ, आज के अलावा एक और दिन था जब मैं काफी कशमकश में था की क्या करूँ...उस दिन प्रभा से मेरी करीब आधे घंटे से भी ज्यादा फोन पे बातें हुईं, शायद प्रभा को याद होगा किस मामले में, उस दिन भी बड़ा अच्छा महसूस किया था मैंने :) आज भी थोड़ी हलकी डांट सुना ही दी इसने, ये डांट तो इसकी खूबी है..असल में डांट भी नहीं कहूँगा उसे, क्यूंकि बहुत प्यारा बोलती है जो भी बोलती है ये जब गुस्से में रहती है..मैंने तो ऐसे ही मजाक में उसे डांट का नाम दे रखा है :) मेरी एक और दोस्त है शिखा, दोनों जब गुस्से में होते हैं तो एक सी ही बातें करतीं हैं :)
प्रभा मुझे बहुत अच्छी तरह जानती है, लेकिन कभी कभी ये ओवर-कान्फिडन्स भी दिखाती है ये कह के की "आप जो भी करोगे अच्छा ही करोगे" ;) अब ये तो ओवर-कान्फिडन्स वाली ही बात हुई न..अब मैं कोई टैलन्टड या गुणों से भरपूर व्यक्ति तो हूँ नहीं, तो ऐसे में इसकी ये सोच तो एक बड़ी ग़लतफ़हमी है न :) पता नहीं क्यों इसे इस बात की बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है की मैं बहुत ही ज्यादा गुणों से भरपूर व्यक्ति हूँ...ये गलत सोच इसकी कहाँ से आई, ये मुझे भी नहीं पता :P मैं तो एक बहुत ही सामान्य सा, साधारण सा व्यक्ति हूँ जो कुछ सपनो के पीछे लगातार भागे जा रहा है....जितना मैं सपनों के पीछे भागता हूँ, सपने उतना ही दूर होते जाते हैं मुझसे....अब तो ये एक बोझ सा लगता है की इतने सारे लोगों को मेरे से कितनी उम्मीदें हैं...डर लगता है कभी कभी की इन सब की उमीदों पे खरा उतर भी पाऊंगा या नहीं....
अरे मैं तो टोपिक से हटते जा रहा था...अपने बारे में बातें शुरू करने लगा :P खैर, प्रभा के बारे में ये पोस्ट लिखने को मैं बहुत पहले ही सोचा था, सोचा की उसके जन्मदिन पे ये पोस्ट उसे दिखाऊंगा...लेकिन उसके जन्मदिन पे नहीं लिख पाया, तो आज लिख रहा हूँ... :) कुछ कारणों से ये पोस्ट मैं अपने मुख्य ब्लॉग "मेरी बातें" पे पोस्ट नहीं कर रहा हूँ.....
ये कभी कभी बेवकूफी वाली बातें भी करती है..लेकिन इसकी सब बातें बहुत ही क्यूट और प्यारी सी लगती है..समझदार तो है ही लेकिन कभी कभी बिना सर-पैर वाली बातें भी करने लगती है ;) मुझे तो इसकी हर बात अच्छी लगती है, हर बात पे दिल खुश होता है :) बस यही दुआ करूँगा की ये जहाँ भी रहे, अच्छे से रहे, खुश रहे...हँसती रहे :)


first of all thanks alot ki aapne mujhe itni importance di .. which i really dont know i deserve or not :) ..... thnks alot bhaiya .. ki aapne mujhe apne family member jaisa mana :) ..
ReplyDeleteand as u said "प्रभा मुझे बहुत अच्छी तरह जानती है," iska matlab hai ki mein jaanti hoon ki aapmein kya quality hai kya nahi aur agar meine kaha hai aap jo chaho kar skte ho to matlab kar skte ho :P :) ...
thnks aapne jo bhi kuch kaha mere liye .. i really dont know ismein se kitna sach h aur kitna jhoot :o :D...
aapne kaha "जितना मैं सपनों के पीछे भागता हूँ, सपने उतना ही दूर होते जाते हैं मुझसे." to bhaiya ye lines humesha yaad rakhna "NEVER WORRY FOR THE DELAY IN SUCCESS COMPARED TO OTHERS...BECOZ CONSTRUCTION OF A PYRAMID ALWAYS TAKES MORE TIME THAT AN ORDINARY BUILING..." :)
बहुत स्वीट पोस्ट है ये :)
ReplyDeleteवाह क्या प्यारा सा पोस्ट है ये :-))
ReplyDeleteबहुत खूबसूरती से लिखा हुआ.
प्रभा भी बड़ी प्यारी लगी हमें.
mast !! osum ... prabha ji hai hi bht bht cute :) :) :)
ReplyDelete@प्रभा, मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा....तो ये क्यों बोली की कितना सच कितना झूठ???हद है..
ReplyDeleteऔर देखो तुम सबको इस बात का प्रमाण दे रही हो की तुम बातुनी हो और सुझाव देते रहती हो ;)
लास्ट वाली लाईन बड़ा सही लिखी है तुम :)
हमरे जनम पर त हमरा कोनो अधिकार नहीं है.. माँ बाप चुनने का मौका किसी को नहीं मिलता है..लेकिन दोस्त चुनने का अधिकार त हमारा है.. .और ऐसे में अगर चुनकर, अपने मन से एक छोटी बहन या दोस्त जैसी बहन मिल जाए, त परमात्मा का सुक्रिया अदा करना..दिल से लिखे हो..दिल से लिखते रहो!!
ReplyDelete@abhi bhaiya ...... jhoot matlab aapne wo jo likha ki cute hai etc etc :D uske liye bola meine ...
ReplyDeletebaaki aapne jo likha i know sab dil se likha or dil se likhi koi bhi baat jhoot nahi hoti :)
thnks
@sikha di ... thnks :)
ReplyDelete@salil ji ... thnks :)
अभिषेक ! मुझे तुम्हारी ये प्यारी सी दोस्त बहुत अच्छी लगी. उसे और तुम्हें भी ढेर सारा स्नेह.
ReplyDeleteअभिसेक! कईसन अमदी हो तुम...अमदी हो कि पजामा...हम त ऊ परभा का जवाबे देखकर अलबला गए...अब ऊ बच्चा है,उसको का बोलें...बाकी तुमको बताना चाहिए था ना...हमको बोलती है थैंक्यू सलिल जी...बताओ,कि चच्चा को थैंक्यू नहीं बोलते हैं अऊर सलिल जी..बाप रे!!! घोर अपमान!!
ReplyDelete@चाचा जी
ReplyDeleteबिलकुल मेरा गलती है...मानते हैं इसको...
हम न बताये थे की आप हमरे चचा हैं...
हम भी अभी देखें प्रभा का कमेन्ट..:)
अब तो उसको पता चल गया है चचा...अब आगे से हम भी ध्यान रखेंगे :) :)
@mukti ... thnks :)
ReplyDelete@chacha ji .. thnk u once again :D aur salil ji bola to kya hua :o
@prabha, kya tum apne chacha ko unke naam se bulati ho?
ReplyDeletenahi na....isliye unhone ye kaha :)
@bhaiya ... oho :o sahi keh rahe ho
ReplyDelete@chacha ji .. sorry sorry :( galti se mistake ho gayi .. bt saari galati bhaiya ki hai :P
चलिए आपकी प्यारी सी बहन औऱ दोस्त से मिलकर खुशी हुई। सही है कि संसार में दोस्ती मिल जाए तो समझिए की संसार मिल गया। काफी पहले आया था आपके ब्लॉग पर। फिर आज आया। दर्द यहां बिखरते हैं और अपनी बात किसी औऱ ब्लॉग पर करते हैं। अंदाज अच्छा है। वैसे बारिश फिर कभी नहीं हुई। वैसे भी हर बारिश वैसी ही हो जाएगी तो फिर उस बारिश का मतलब ही क्या। कभी कभी दर्द को हल्के हल्के से सहलाने का मजा ही कुछ औऱ है.....बेहतर ...
ReplyDelete@boletobindas
ReplyDeleteशुक्रिया जी, :)
अजीब सी बात है ना सर कि हम पता नहीं क्यों किसी के इतने करीब आ जाते हैं...कभी-कभी हमारे खून के रिश्ते भी हमे अपने बनाए हुए रिश्तों के सामने फीके लगने लगते हैं....पर शायद कई बार हम किसी अपने की publicity करके कुछ गलत कर बैठते हैं...ये मेरा अपना विचार है...बांकी आप भी एक बार गैर फरमाईएगा...
ReplyDeleteबांकी
तो हम नादान हैं यारो...
हमसे भी खता हो सकती है...
बस आप अपना समझ लेना
और माफ करना दोस्तो
"माफ़ी"--बहुत दिनों से आपकी पोस्ट न पढ पाने के लिए ...
ReplyDeletevery sweet post...
ReplyDeleteare waah...ye toh achha hai :)
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