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वे शुरू वसंत के दिन थे.लड़का और लड़की, दोनों को ये वसंत का मौसम बड़ा अच्छा लगता था.गर्मियों और सर्दियों का कम्बाइन्ड इफेक्ट जैसा कुछ होता है इस मौसम में.ये लड़की उन दिनों कहा करती थी.सर्दियाँ खत्म नहीं हुई थी और शाम में हलकी धुंध सड़कों पे हो जाया करती थी.वे दोनों देर शाम तक साथ रहते..या तो पार्क में बैठे रहते या फिर सड़कों पे घूमते.सड़कें बेहद व्यस्त रहती.लेकिन दोनों उसी सड़क के चक्कर काटते रहते.लड़के ने उन दिनों एक खेल शुरू किया था जिसकी खबर सिर्फ उसे थी, लड़की को उसने इस खेल के बारे में कुछ नहीं बताया था..वैसे उन दिनों इस खेल के अलावा भी बहुत कुछ ऐसा था जिसकी खबर सिर्फ उस लड़के को थी,लड़की को नहीं.व्यस्त सड़कों पे चलते हुए जब भी कोई तेज रफ़्तार की गाड़ी होर्न बजाते हुए पास से गुज़रती, तो लड़का उस लड़की को चुपके से 'आई लव यु' कहता.ये 'आई लव यु' इतना धीमे होता की ट्रैफिक और गाड़ियों के शोर के नीचे दब के रह जाता और खुद उस लड़के को भी सुनाई नहीं देता की उसने क्या कहा.लड़का जब भी लड़की से प्यार के ये तीन शब्द कहता तो उसे कम से कम इस बात की खुशी रहती की उसने अपने दिल की बात कह दी है.लेकिन लड़का जब भी लड़की से ये तीन शब्द कहता,लड़की हमेशा बड़े विस्मय से उसके तरफ देखती, और उस समय उसके चेहरे का भाव भी कुछ इस तरह का होता की लड़के को एक पल ये भ्रम होता लड़की सब जानती है, उसके दिमाग में क्या चल रहा, वो कौन सी बात उससे छुपा रहा है और उसने वे तीन शब्द भी सुन लिए जिसे वो खुद भी नहीं सुन पाया था.लड़की जब उससे पूछती की उसने क्या कहा तो लड़का कुछ भी बहाना बना देता था.लेकिन उसे हमेशा लगता की लड़की को सब पता है..जबकि लड़की को कुछ भी पता नहीं रहता, ये मात्र उसका वहम था.
फिर कुछ साल गुज़रे, लड़की को अब लड़के की सभी बातें मालुम हैं और वो भी लड़के से प्यार करने लगी है...एक सर्दियों की शाम आई..वे पुराने दिनों की तरह ही सड़कों पे चल रहे थे, की अचानक लड़के को अपने उस खेल की याद आई.उसने फिर से गाड़ियों के शोर के बीच लड़की से 'आई लव यु' कहा.हमेशा की तरह लड़की ने जब उससे पूछा की उसने क्या कहा, तो लड़के ने इस बार जवाब में कहा "मैंने तुम्हे आई लव यु कहा".लड़की इस जवाब के लिए तैयार नहीं थी और एक पल तो उसे लगा की वो क्या करे..वो शरमाने लगी और बस एक 'धत्त' कह कर लड़के को अपने से अलग धकेल दिया..लड़के ने फिर उससे कहा - 'पता है पहले जब हम युहीं सड़कों पे घुमा करते थे तो मैं अक्सर ट्रैफिक के शोर में तुम्हे 'आई लव यु' कहता था, लेकिन तुम सुन नहीं पाती थी और मैं अपनी बेवकूफी पे खुश हो जाया करता था'.लड़की को अब समझ में ही नहीं आ रहा था की वो इस बात का क्या जवाब दे...इस बार वो कुछ भी नहीं कह सकी.'धत्त' भी नहीं, बस उसकी नज़रें नीची हो गयी, और चेहरा बिलकुल सुर्ख लाल.लड़के ने पहली बार उसका चेहरा शर्म से लाल होते देखा था.

mujhe pata hai ye post ... maine sbse pehle suni thi ... awesome idea ... and b'fully written ..! :)
ReplyDelete:)
ReplyDeleteकोमल सुंदर एहसास ....
ReplyDeleteशुभकामनायें ...
वाह, मन की बात भी कह दी और कहने के बाद सामने वाले द्वारा होने वाली प्रत्याशित/अप्रत्याशित प्रतिक्रिया का बोझ भी नहीं:)
ReplyDeleteभावमय शब्द संयोजन लिए अनुपम पोस्ट
ReplyDeleteशुरू की कुछ पंक्तियाँ और गज़ब का फोटो ... अचानक फंतासी दुनिया में ले जाने के लिए काफी हैं ... और उसके बाद तो रो में बहता ही गया अपने आप ....
ReplyDelete:-)
ReplyDeleteमानों गुलाबी रंग से लिखी हो रचना....
हुजूर, आपकी कल्पना भी प्रेम में होते खाने लगी।
ReplyDeleteचित्र बहुत सुंदर लगाया है...
ReplyDeletebahut he pyari post hai abhi!
ReplyDeleteye dhat se mujhe wo kahani yaad aa gai jisme lagka ladki se poochata hai teri kudmaai ho gai? aur ladki kahti hai 'dhat". :) acchi post
ReplyDeleteप्यारा सा ..उफनता ,भिंगोता ..बस.. प्यार का ... अहसास..
ReplyDeleteकारों के हॉर्न संगीतमय होने का इंतज़ार है - कहानी का अगला पड़ाव सड़क के बजाय किसी संगीत समारोह में होना चाहिये। :)
ReplyDeleteसुंदर एहसास ....
ReplyDeleteएक रूमानी अहसास :)
ReplyDeleteएक इन्नोसेंट सी कहानी ..जो कब शुरू हुई...कब ख़त्म ..अहसास ही नहीं हुआ ...बहुत सुन्दर ..पहली बार पढ़ा आपको अभिजी ...अच्छा लगा आपका लेखन !
ReplyDeleteप्यार का कोमल अहसास संजोए एक प्यारी सी लघु-कहानी...सुन्दर...। मेरी बधाई...।
ReplyDeleteप्रियंका
कल 11/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
ReplyDeleteधन्यवाद!
सुंदर अभिव्यक्ति ...
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर थी यह कहानी....
ReplyDelete:-)